कॉर्न (मक्के) की ट्रेडिंग

कॉर्न दुनिया के सबसे बहुमुखी एवं जटिल अनाजों में है। संयुक्त राज्य अमेरिका कॉर्न का सबसे बड़ा उत्पादक है, और 2013 में इस अनाज की लगभग 13.99 अरब बुशल की रिकॉर्ड उपज दर्ज की गई, जहां 1 बुशल 56 पाउंड के समान है। चीन और ब्राजील इस फसल के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े उत्पादक हैं। कॉर्न दुनियाभर में एक मुख्य कमॉडिटी है जिसे पशु-चारे से लेकर प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में कॉर्न सिरप से लेकर, ऊर्जा स्रोतों के लिए प्रयुक्त कॉर्न, इत्यादि में भी प्रयोग किया जाता है।

कॉर्न की कीमतों को प्रभावित कर सकने वाले कारक

  • मार्च से सितंबर तक बाजार में आपूर्ति की संभावना से कीमतें बहुत प्रभावित होती हैं। ये संभावनाएं रोपित भूमि के क्षेत्रफल, संभावित उपज और मौसम की परिस्थितियों तथा USDA द्वारा जारी साप्ताहिक रिपोर्ट में उल्लिखित फसल की प्रगति पर निर्भर करती हैं। संभावनाएं तेजी से बदल सकती हैं जिनके परिणामस्वरूप कीमतें अस्थिर हो सकती हैं।
  • औसत वर्ष में, संयुक्त राज्य अमेरिका की कॉर्न उपज का एक तिहाई जैव ईंधन के उत्पादन में लगाया जाता है। अमेरिका की EPA (पर्यावरण संरक्षण एजेंसी), जो कि एक बड़ी ऊर्जा नीति का भाग है, अब एथेनॉल के लिए प्रयुक्त कॉर्न की मात्रा में वृद्धि की मांग कर रही है। विशिष्ट मौसम में कॉर्न की उपज के आधार पर कीमतें घट या बढ़ सकती हैं।
  • बेवक्त की मौसमी मार के चलते कॉर्न के प्रत्याशित उत्पादन में कमी हो सकती है जिसके फलस्वरूप मांग एवं कीमत में उछाल आ सकता है। सरप्‍लस होने पर कीमत कम हो जाएगी। इसलिए ट्रेडरों को मौसमी परिस्थितियों एवं कॉर्न की पैदावार पर होने वाले उनके प्रभाव पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • चीन, दक्षिणी अमेरिका और यूक्रेन में किसान अब और अधिक जमीन पर कॉर्न उगा रहे हैं। ट्रेडरों को विचार करना चाहिए कि इस बढ़ी हुई आपूर्ति के लिए मांग बढ़ेगी या नहीं और यह कीमतों को कैसे प्रभावित करेगी।

कोई भी व्यक्ति जो कॉर्न में ट्रेड करना चाहता है, उसे कीमतों को प्रभावित कर सकने वाले विभिन्न कारकों के बारे में पता होना चाहिए।

कॉर्न (मक्के) की ट्रेडिंग