चांदी की ट्रेडिंग

चांदी सबसे सफ़ेद, बेहद आघातवर्धनीय और सर्वाधिक प्रवाहकीय उपलब्ध धातु है और इसका प्रयोग शताब्दियों से हथियार, आभूषण, बर्तन, मशीनरी और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य सहित भिन्न प्रकार की चीजों में किया जाता रहा है। दुनिया भर में भिन्न देशों द्वारा चांदी में ढले सिक्कों का मुद्रा के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। यद्यपि कई अर्थव्यवस्थाएं कागजी नोटों में रूपांतरित हो गई हैं तथापि वे चांदी और सोने द्वारा समर्थित हैं। वस्तुतः ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग के नामकरण के पीछे स्टर्लिंग सिल्वर के एक पाउंड का होना माना जाता था। यूएस के नोट भी चांदी और सोने द्वारा समर्थित थे। गृहयुद्ध के बाद चांदी का उपयोग बंद कर दिया गया और राष्ट्रपति निक्सन ने 1971 में गोल्ड स्टैंडर्ड को समाप्त कर दिया। इस निर्णय से सोने और चांदी की सार्वजनिक मांग में व्यापक वृद्धि हुई और कीमतों में अत्यधिक तेजी आई। जब एक बार सोने और चांदी का समर्थन हटा दिया गया तो इन बहुमूल्य धातुओं के प्रति रुझान बढ़ा और इनके मूल्य में तेजी देखी गई। कीमती धातुओं में निवेश को मुद्रास्फीति से बचाव का एक अच्छा विकल्प माना जाता है। यद्यपि सोने की अपेक्षा चांदी कम दुर्लभ है तथापि इसने मुद्राओं को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और यह लगातार सोने की कीमतों के साथ अग्रानुक्रम में बनी रही है।

चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकने वाले कारक

  • दुनियाभर में बढ़ती उत्पादन संख्या इसकी कीमतें प्रभावित करेगी। बहुमूल्य धातु होने के नाते, बाज़ार में इसकी कीमत उपलब्धता पर निर्भर है।
  • अगर मुद्रास्फीति की दर बढ़ रही है तो लोग आम तौर पर सोने और चांदी में निवेश करने से हिचकिचाएंगे। मांग बढ़ने पर, कीमतों में मांग के अनुरूप वृद्धि होगी।
  • चांदी की कीमत को सोने की कीमत के साथ सहसंबद्ध किया जाता है। रुझानों से पता चलता है कि सोने में उतार-चढ़ाव के साथ चांदी में उतार-चढ़ाव होता है।
  • चांदी का औद्योगिक उपयोग अन्यों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, फ़ोटोग्राफ़ी और ऑटो उद्योग में भी है। चांदी की औद्योगिक मांग से इसकी कीमतों में भी चढ़ाव देखा जा सकता है।

चांदी में ट्रेड करने के इच्छुक व्यक्ति को, कीमतें प्रभावित करने वाले भिन्न कारकों का पता होना चाहिए।

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