सोने की ट्रेडिंग

कीमती कमोडिटी और धन-समृद्धि का प्रतीक सोना प्राचीन इतिहास के साथ आधुनिक सभ्यता में ट्रेड एवं मुद्रा के लिए भी प्रयुक्त होता रहा है। सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश चीन है जो सालाना 370 मीट्रिक टन का उत्पादन करता है। ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और दक्षिण अफ्रीका भी महत्वपूर्ण सोना उत्पादक देश हैं। 

गोल्ड स्टैंडर्ड (स्वर्ण मानक)

1965 में, सभी प्रमुख देशों ने वैश्विक सोना मानक प्रणाली में हिस्सा लिया जिसे ब्रेटन वुड्स व्यस्था के नाम से जाना जाता है, जिसमें सोने की कीमत को कागजी मुद्रा से लिंक किया जाता है। 

फिर 1971 में, राष्ट्रपति निक्सन ने संयुक्त राज्य अमेरिका में गोल्ड स्टैंडर्ड को समाप्त कर दिया और आज, कोई भी देश किसी गोल्ड स्टैंडर्ड सिस्टम का उपयोग नहीं करता। गोल्ड स्टैंडर्ड के हटाए जाने से सोने के मूल्य में तेजी से वृद्धि हुई। 1971 से 1980 तक, एक औंस सोने की कीमत 35 से बढ़कर 850 डॉलर हो गई। 

वित्तीय संकट और अस्थिरता के दौर में सोने की कीमत बढ़ जाती है क्योंकि सोना एक सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की अस्थिरता में, गोल्ड स्टैंडर्ड सिस्टम की वापसी पर चर्चा हो रही है लेकिन अब तक इस पर केवल सैद्धांतिक सहमति ही बन पाई है। 

वे कारक जो सोने की कीमतें प्रभावित कर सकते हैं

  • इलेक्ट्रॉनिक्स में सोने का व्यापक प्रयोग होता है। किसी भी स्मार्टफ़ोन, कंप्यूटर, या केबल में सोना (गोल्ड) होने की संभावना होगी। विद्युत प्रौद्योगिकी में तेज विकास से सोने की मांग लगातार जारी रहेगी। 
  • सोने का उत्पादन मांग पूरा करने में असमर्थ है जिसके चलते कीमतें उच्च बनी रहती हैं। यह स्थिति के अगले कुछ दशकों में और अधिक बिगड़ने की उम्मीद है। मांग के साथ तालमेल रखने में आपूर्ति असमर्थ है जिसके फलस्वरूप 1,000 टन का वार्षिक कमी होती है। 
  • वर्तमान में, भारत 700 टन प्रति वर्ष की अनुमानित दर से सोने का सबसे बड़ा वैश्विक उपभोक्ता है। इस संख्या में वृद्धि होना लगातार जारी है और भारत में सोने की मांग से आने वाले वर्षों में कीमतों में और भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। 
  • विभिन्न देशों में मंदी और वित्तीय संकट से सोने में पुनर्निवेश करने का संकेत मिलता है। प्रमुख देशों की आर्थिक स्थिरता पर नजर रखने के साथ साथ, विश्वयापी राजनीतिक स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। 

सोने में ट्रेड करने के इच्छुक व्यक्ति को, कीमतें प्रभावित करने वाले भिन्न कारकों का पता होना चाहिए और उसे निजी विश्लेषण करना चाहिए। 

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